उत्तराखण्ड

तमिलनाडु चुनाव से पहले टीवीके ने डीएमके गठबंधन छोड़ा

तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तमिझागा वाझवुरीमई कत्छी (TVK) के अध्यक्ष टी. वेलमुरुगन ने रविवार को आधिकारिक तौर पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने की घोषणा की। वेलमुरुगन ने आरोप लगाया कि गठबंधन के भीतर उनके दल के साथ “बड़े भाई जैसा व्यवहार” किया जा रहा था, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को प्रबल करता है।

गठबंधन टूटने के मुख्य कारण और घटनाक्रम

टी. वेलमुरुगन ने स्पष्ट किया कि डीएमके के साथ उनके मतभेद मुख्य रूप से सीट-बंटवारे और नीतिगत उपेक्षा के कारण उत्पन्न हुए। चर्चाओं के दौरान, डीएमके ने टीवीके को आगामी चुनावों के लिए केवल एक सीट की पेशकश की थी, जिसे पार्टी ने अपने जनाधार का अपमान मानते हुए ठुकरा दिया। वेलमुरुगन के अनुसार, उनकी पार्टी ने किसानों, मछुआरों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के कल्याण के लिए 10 प्रमुख मांगें रखी थीं, लेकिन सरकार ने इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

टीवीके अध्यक्ष ने सदन के भीतर और बाहर इन मुद्दों को लगातार उठाने का दावा किया, लेकिन उनका आरोप है कि सत्ताधारी दल ने उनके स्वतंत्र स्टैंड को पसंद नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और राजनीतिक तत्वों ने उनकी पार्टी को दरकिनार करने में भूमिका निभाई, क्योंकि उन्हें डर था कि अधिक प्रतिनिधित्व मिलने पर टीवीके शासन की कमियों और कॉर्पोरेट प्रभाव को उजागर कर सकती है।

नीतिगत आलोचना और स्थानीय मुद्दे

लेखन और आधिकारिक बयानों के अनुसार, वेलमुरुगन ने नेवेली में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के निवासियों को बिना उचित मुआवजे या पुनर्वास के विस्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने नीलगिरी जिले में आदिवासी भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया। टीवीके नेता का कहना है कि प्रशासन सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हट रहा है और कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा जाति-आधारित जनगणना का है। वेलमुरुगन ने राज्य सरकार पर इस मुद्दे पर जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। उनका मानना है कि पिछड़ों और वंचितों को उनका हक दिलाने के लिए यह जनगणना आवश्यक है, लेकिन सरकार शक्तिशाली समूहों के दबाव में इसे नजरअंदाज कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ उनके कोई व्यक्तिगत मतभेद नहीं हैं, बल्कि यह विरोध विशुद्ध रूप से राजनीतिक और नीति-आधारित है।

राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की रणनीति

टीवीके के इस फैसले का असर 2026 के चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। वेलमुरुगन ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल नहीं होंगे। इसके बजाय, वह एक नया विकल्प तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। वर्तमान में, टीवीके लगभग 25 छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत कर रही है।

तमिलनाडु की राजनीति अब बहुकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है। एक तरफ डीएमके का नेतृत्व है, दूसरी तरफ अन्नाद्रमुक (AIADMK) और एनडीए का गठबंधन है, और अब वेलमुरुगन का संभावित नया मोर्चा भी मैदान में होगा। साथ ही, अभिनेता से नेता बने विजय की राजनीतिक सक्रियता ने भी इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। वेलमुरुगन का लक्ष्य “मूल्य-आधारित राजनीति” करना और उन वर्गों का प्रतिनिधित्व करना है जो मुख्यधारा के बड़े दलों द्वारा उपेक्षित महसूस करते हैं।

निष्कर्ष और आगे की राह

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, राज्य में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को मतगणना की जाएगी। टीवीके का गठबंधन से बाहर आना यह दर्शाता है कि राज्य के छोटे दल अब बड़े क्षेत्रीय दलों के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वेलमुरुगन किन दलों के साथ मिलकर नए मोर्चे की औपचारिक घोषणा करते हैं और यह मोर्चा मतदाताओं के बीच कितनी पैठ बना पाता है।

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