उत्तराखण्ड

वित्त अधिनियम 2026 अधिसूचित: नए कर प्रावधान लागू

आगामी वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय ढांचे को अंतिम रूप देते हुए, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर वित्त अधिनियम 2026 को अधिसूचित कर दिया है। 30 मार्च 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद, इस अधिनियम के प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। इसके साथ ही बजट 2026-27 का विधायी चक्र पूरा हो गया है, जिसमें पूंजीगत लाभ (Capital Gains) और विशेष रूप से कॉर्पोरेट शेयर बायबैक से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव पेश किए गए हैं।

वित्त विधेयक 2026 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद कानून और न्याय मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की। लोकसभा ने 25 मार्च को 32 संशोधनों के साथ इस विधेयक को पारित किया था, जिसके बाद पिछले सप्ताह राज्यसभा ने इसे ध्वनि मत से वापस कर दिया था।

बायबैक पर 12% सरचार्ज: एक बड़ा बदलाव

वित्त अधिनियम 2026 का सबसे चर्चित प्रावधान शेयर बायबैक के लिए सरचार्ज (Surcharge) तंत्र में किया गया बदलाव है। 1 अप्रैल से, बायबैक योजनाओं के माध्यम से व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट शेयरधारकों द्वारा प्राप्त पूंजीगत लाभ पर 12% का फ्लैट सरचार्ज लगेगा।

  • पुराना नियम: पहले सरचार्ज करदाता की कुल आय के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों (Slabs) में था। ₹50 लाख तक की आय वाले व्यक्तियों पर कोई सरचार्ज नहीं था, जबकि ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच की आय पर 10% सरचार्ज लगता था।

  • नया नियम: अब आय की सीमा के बावजूद, बायबैक से होने वाले लाभ पर सीधा 12% सरचार्ज देना होगा। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा, जबकि हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के लिए प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

टैक्स एक्सपर्ट वेदांत भारद्वाज ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा: “बायबैक पर 12% का फ्लैट सरचार्ज प्रगतिशील कराधान (Progressive Taxation) के सिद्धांत से अलग कदम है। यह गणना को तो सरल बनाता है, लेकिन उन छोटे शेयरधारकों के लिए प्रभावी टैक्स दर को काफी बढ़ा देता है जो पहले 0% या 10% के दायरे में थे।”

राजकोषीय रोडमैप और व्यय

केंद्रीय बजट 2026-27, जो अब इस अधिनियम द्वारा संहिताबद्ध (Codified) है, ₹53.47 लाख करोड़ के कुल व्यय की रूपरेखा तैयार करता है—जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 7.7% अधिक है।

  • पूंजीगत आवंटन: बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक संपत्तियों के लिए ₹12.2 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं।

  • राजस्व लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य ₹44.04 लाख करोड़ का कुल टैक्स राजस्व एकत्र करना है।

  • राजकोषीय घाटा: वित्त मंत्रालय ने राजकोषीय घाटे को चालू वर्ष के 4.4% से घटाकर 2027 वित्तीय वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.3% रहने का अनुमान लगाया है।

बायबैक कराधान का विकास

ऐतिहासिक रूप से, बायबैक पर कंपनी के स्तर पर टैक्स (Buyback Distribution Tax) लगता था और शेयरधारकों के लिए यह कर-मुक्त था। हालांकि, हाल के वर्षों में इसे प्राप्तकर्ता (Shareholder) के हाथों में टैक्स लगाने की ओर स्थानांतरित किया गया है। 2026 का अधिनियम इसे और अधिक परिष्कृत करता है ताकि निवेशक की कुल आय चाहे जो भी हो, बायबैक लाभ पर सरचार्ज एक समान रहे।

1 अप्रैल की तैयारी

जैसे ही नया वित्तीय वर्ष शुरू हो रहा है, वित्त अधिनियम 2026 निवेशकों और कॉर्पोरेट्स के लिए एक स्पष्ट, लेकिन अधिक मांग वाला रास्ता तय करता है। जहाँ एक ओर पूंजीगत व्यय पर ध्यान विकास के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है, वहीं बायबैक पर मानकीकृत सरचार्ज टैक्स खामियों को दूर करने और राजस्व जुटाने के प्रयास का संकेत देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *