उत्तराखण्ड

सूचना युद्ध और छल का एल्गोरिदम

आधुनिक युद्ध का ‘गुरुत्वाकर्षण केंद्र’ अब केवल दुश्मन की सेना नहीं रह गया है। 2026 के भू-राजनीतिक परिदृश्य में, नया युद्धक्षेत्र शांत, अदृश्य और हर नागरिक की हथेली में मौजूद मोबाइल फोन में है। सूचना युद्ध (Information Warfare) हाइब्रिड संघर्ष का सबसे घातक हथियार बनकर उभरा है, जहाँ अंतिम लक्ष्य दुश्मन को भौतिक रूप से नष्ट करना नहीं, बल्कि उसकी जनता के मनोबल और लड़ने की इच्छाशक्ति को समाप्त करना है।

जैसे-जैसे शारीरिक और मानसिक संघर्ष के बीच की रेखाएं धुंधली हो रही हैं, सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि “सूचना आधारित स्थानीय युद्ध” (Informatized Local Wars) अब कोई भविष्य का खतरा नहीं बल्कि वर्तमान की हकीकत हैं।

‘तीन युद्ध’ रणनीति (Three Warfares Strategy)

इस वैचारिक बदलाव के केंद्र में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की ‘तीन युद्ध’ रणनीति है। यह सिद्धांत पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर मानवीय मस्तिष्क को निशाना बनाता है:

  1. मनोवैज्ञानिक युद्ध: दुष्प्रचार के जरिए दुश्मन के मनोबल को तोड़ना।

  2. मीडिया युद्ध: सोशल मीडिया और मुख्यधारा के मीडिया के माध्यम से जनमत को प्रभावित करना।

  3. कानूनी युद्ध (Lawfare): दबाव बनाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रणालियों का उपयोग करना।

धोखे के इस एल्गोरिदम को तीन स्तंभों— कथानक (Narrative), विश्वसनीय वाहक (Credible Carriers), और दोहराव (Repetition) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

एआई (AI): धोखे का नया हथियार

2026 में जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रभावशीलता ने दुनिया को चौंका दिया है। एआई टूल का उपयोग करके, कोई भी विदेशी दुश्मन चंद सेकंड में ऐसे ‘डीपफेक’ वीडियो बना सकता है जो भारत की आंतरिक खामियों का फायदा उठा सकें। उदाहरण के तौर पर, किसी विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं के फर्जी भड़काऊ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा सकते हैं, जिससे वास्तविक अराजकता पैदा हो सकती है।

भारत के लिए चुनौती और अवसर

भारत और चीन के बीच सैन्य और आर्थिक विषमता (असिमिट्री) काफी बड़ी है—एक तरफ 19 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और दूसरी तरफ 4 ट्रिलियन डॉलर की। हालांकि, सूचना युद्ध के क्षेत्र में यह अंतर काफी कम हो जाता है। चाणक्य ने कहा था, “कोश की शक्ति से ही सेना का जन्म होता है।” लेकिन आज के युग में, सामाजिक प्रभाव और मानसिक पूर्वाग्रह ‘असिमिट्रिक लेवलर’ का काम करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार जब जनता अपनी सेना पर विश्वास खो देती है, तो युद्ध वहीं समाप्त हो जाता है। इसलिए, भारत को न केवल अधिक मारक क्षमता (Firepower) में निवेश करना चाहिए, बल्कि अपने नागरिकों को “संज्ञानात्मक सुरक्षा” (Cognitive Armor) भी प्रदान करनी चाहिए ताकि वे धोखे के इस एल्गोरिदम का शिकार न बनें।

युद्ध की प्रकृति बदल गई है; जहाँ जमीन पर सेनाएं लड़ रही हैं, वहीं साइबर क्षेत्र में आबादी से आबादी का मुकाबला है। हमें जीतने के लिए हर उस हथियार का उपयोग करना होगा जो दुश्मन को सबसे ज्यादा चोट पहुँचाता है—चाहे वह बैलिस्टिक मिसाइल हो या एक सोशल मीडिया हैंडल।

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