उत्तराखण्ड

सारण में बाढ़ का बढ़ा खतरा, 48 गांव प्रभावित; 33 नाव और बोट एंबुलेंस से राहत कार्य जारी

छपरा (सारण)। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते बिहार के सारण जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने जिले के पांच प्रखंडों को बाढ़ प्रभावित घोषित करते हुए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। बुधवार शाम चार बजे तक 18 पंचायतों के 48 गांव बाढ़ की चपेट में थे। इन क्षेत्रों में करीब 24,725 लोग और 4,220 परिवार प्रभावित बताए गए हैं।

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे हैं। जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए राहत-बचाव के संसाधनों को सक्रिय किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाना है।

33 नाव और बोट एंबुलेंस तैनात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 33 नावों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा एक बोट एंबुलेंस भी संचालित की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पांच चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जबकि पशुओं के इलाज के लिए पशु चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। राहत कार्यों के लिए एक राहत केंद्र संचालित है, जहां फिलहाल 50 लोग आश्रय लिए हुए हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए तीन एनडीआरएफ/एसडीआरएफ टीमें भी उपलब्ध हैं। अब तक प्रभावित परिवारों को 950 पॉलीथिन शीट वितरित की जा चुकी हैं।

14 सामुदायिक रसोई में पांच हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर और परसा प्रखंडों में 14 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनके जरिए करीब पांच हजार लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। पानापुर में दो, तरैया में तीन, अमनौर में एक, मकेर में पांच और परसा में तीन सामुदायिक रसोई चल रही हैं।

तरैया में चंचलिया, माधोपुर और भटगाई में रसोई संचालित है। वहीं मकेर के बाघाकोल, कस्बा मकेर, भाथा और पीर मकेर समेत प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रशासन ने नदी और तटबंध के संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। लोगों से नदी और तटबंध के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है। जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के अनुसार राहत एवं बचाव कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

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